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दशा - आपके जीवन के अध्याय

वह एक बात जो वैदिक ज्योतिष को अलग बनाती है: आपकी कुंडली सिर्फ़ यह नहीं बताती कि आप कैसे हैं, वह एक तय समय पर खुलती भी है। जानिए विंशोत्तरी दशा।

✦ 6 मिनट में पढ़िए · 120 साल का चक्र · 9 ग्रह

घड़ी, फ़ैसला नहीं

दशा किसी ग्रह का काल होती है - वे साल, जिनमें एक ग्रह आपके जीवन का रंग तय करता है। सबसे ज़्यादा चलन विंशोत्तरी पद्धति का है। इसमें नौ ग्रह 120 साल के एक चक्र में बँटे होते हैं। आपका चक्र कहाँ से शुरू होगा, यह आपके जन्म नक्षत्र से तय होता है। इसीलिए किन्हीं दो लोगों का यह सफ़र एक जैसा नहीं होता।

दशा कोई भविष्यवाणी नहीं होती। यह एक विषय होता है - वह बात जो जीवन का यह हिस्सा आपसे बार-बार सीखने को कहता है।

120 साल का विंशोत्तरी चक्र

  • केतु7 साल
  • शुक्र ♀20 साल
  • सूर्य ☉6 साल
  • चंद्र ☽10 साल
  • मंगल ♂7 साल
  • राहु18 साल
  • गुरु ♃16 साल
  • शनि ♄19 साल
  • बुध ☿17 साल

काल के भीतर काल

हर महादशा एक बड़ा काल होता है। यह नौ अंतर्दशाओं यानी छोटे कालों में बँटती है। ग्रहों का क्रम वही रहता है, बस हर काल छोटा हो जाता है। 20 साल की शुक्र महादशा शुक्र-शुक्र से शुरू होती है। फिर शुक्र-सूर्य। फिर शुक्र-चंद्र। और इसी तरह आगे। पुरानी पद्धतियाँ इससे भी गहरे जाती हैं, पर ज़्यादातर कहानी बड़ा और छोटा काल ही बता देते हैं।

इसीलिए कुछ साल पिछले सालों से बिलकुल अलग लगते हैं। छोटा काल बदला, तो विषय का रंग भी बदल गया।

अपनी दशा कैसे पढ़ें

सिर्फ़ इतना जान लेने से कि "मैं शनि महादशा में हूँ", ज़्यादा कुछ पता नहीं चलता। असल बात यह है कि शनि आपकी कुंडली में कैसे बैठा है। वह किन भावों का स्वामी है? वह कहाँ बैठा है? उसकी दृष्टि किन भावों पर पड़ती है? अच्छी जगह बैठे शनि का काल अक्सर जीवन के सबसे मज़बूत साल लेकर आता है - धीमे, टिकाऊ और चुपचाप अच्छे।

आप किस अध्याय में चल रहे हैं?

Cosmic Take पहले ही दिन आपकी पूरी दशा टाइमलाइन दिखा देता है।

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