तस्वीर
अपनी जन्म तारीख़, समय और जगह बताइए। इससे हम ठीक-ठीक बता सकते हैं कि उस वक़्त हर ग्रह आकाश में कहाँ था। उसी तस्वीर को चार्ट की शक्ल में उतारा जाता है - यही आपकी कुंडली है। यह कभी नहीं बदलती। बदलता है तो बस उसके ऊपर चलता हुआ आकाश। रोज़ का राशिफल और दशा वहीं से निकलते हैं।
लग्न - शुरुआत का बिंदु
जन्म के समय पूरब में जो राशि उग रही थी, वही आपका लग्न है। यह एक दिन में बारहों राशियों से होकर गुज़र जाता है। इसीलिए आपका जन्म समय इतना मायने रखता है। लग्न ही आपका पहला भाव बनता है और बाक़ी सारे भाव उसी से गिने जाते हैं। ग्रह वही, लग्न अलग - और जीवन बिलकुल अलग।
उत्तर भारतीय चार्ट
उत्तर भारत में जो कुंडली बनती है, उसमें सबसे ऊपर बीच वाला खाना हमेशा पहला भाव होता है। वही लग्न है। भाव यहाँ वामावर्त गिने जाते हैं। राशियाँ बदलती रहती हैं, भाव अपनी जगह टिके रहते हैं।
दक्षिण भारत में यह उल्टा होता है। वहाँ राशियाँ अपनी जगह टिकी रहती हैं और लग्न बदलता है। आकाश एक ही, बनाने के दो तरीक़े।
बारह भावों में क्या-क्या आता है
- स्वयं - आपका शरीर, आपका स्वभाव, आपका नज़रिया
- धन - परिवार, वाणी, आपकी जमा-पूँजी
- पराक्रम - भाई-बहन, मेहनत, बातचीत
- सुख - माँ, जड़ें, भीतर की शांति
- विद्या - संतान, पढ़ाई, प्रेम
- सेवा - सेहत, रोज़ की दिनचर्या, वे मुश्किलें जो आप हरा देते हैं
- साझेदारी - शादी, सौदे, सामने वाला इंसान
- गहराई - बड़ा बदलाव, साझा धन, राज़
- भाग्य - धर्म, गुरु, लंबी यात्राएँ
- कर्म - काम, समाज में पहचान, जो आप बनाते हैं
- लाभ - दोस्त, जान-पहचान, उम्मीदें
- मोक्ष - आराम, एकांत, दूर की जगहें, पीछे छोड़ना